संदेसनि मधुबन-कूप भरे। जो कोउ पथिक गए हैं हयाँ तें फिरि नहिं अवन करे ॥ कै वै स्याम सिखाय समोधे कै वै बीच मरे ? अपने नहिं पठवत नंदनंदन हमरेउ फेरि धरे ॥ मसि खूँटी कागद जल भींजे, सर दव लागि जरे। पाती लिखैं कहो क्यों करि जो पलक-कपाट अरे ?
(UPSC 2014, 10 Marks, )
संदेसनि मधुबन-कूप भरे। जो कोउ पथिक गए हैं हयाँ तें फिरि नहिं अवन करे ॥ कै वै स्याम सिखाय समोधे कै वै बीच मरे ? अपने नहिं पठवत नंदनंदन हमरेउ फेरि धरे ॥ मसि खूँटी कागद जल भींजे, सर दव लागि जरे। पाती लिखैं कहो क्यों करि जो पलक-कपाट अरे ?
संदेसनि मधुबन-कूप भरे। जो कोउ पथिक गए हैं हयाँ तें फिरि नहिं अवन करे ॥ कै वै स्याम सिखाय समोधे कै वै बीच मरे ? अपने नहिं पठवत नंदनंदन हमरेउ फेरि धरे ॥ मसि खूँटी कागद जल भींजे, सर दव लागि जरे। पाती लिखैं कहो क्यों करि जो पलक-कपाट अरे ?
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