आपु हों आपको नीकेके जानत, रावरो राम ! भरायो गढ़ायो। कीर ज्यों नाम रटे तुलसी सो कहै जग जानकीनाथ पढायो॥ सोई है खेद जो बेट कहै, न घट जन -जो रघुबीर बढ़ायो। हों तो सदा रबर को असवार, तिहारोई नाम गयंद चढ़ायो। (UPSC 1983, 20 Marks, )

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