दारुण व्यथा और आघात से उसके जड़ मस्तिष्क में केवल एक ही बात स्पष्ट थी – वेश्या स्वतंत्र नारी है। परतंत्र होने के कारण उसके लिए कहीं शरण और स्थान नहीं। दासी होकर वह परतंत्र हो गई? ... वह स्वतंत्र थी ही कब? ... अपनी संतान को पा सकने की स्वतंत्रता के लिए ही उसने दासत्व स्वीकार किया। अपना शरीर बेचकर उसने इच्छा को स्वतंत्र रखना चाहा। परंतु स्वतंत्रता मिली कहाँ? कुल-नारी के लिए स्वतंत्रता कहाँ है? (UPSC 2016, 10 Marks, )

दारुण व्यथा और आघात से उसके जड़ मस्तिष्क में केवल एक ही बात स्पष्ट थी – वेश्या स्वतंत्र नारी है। परतंत्र होने के कारण उसके लिए कहीं शरण और स्थान नहीं। दासी होकर वह परतंत्र हो गई? ... वह स्वतंत्र थी ही कब? ... अपनी संतान को पा सकने की स्वतंत्रता के लिए ही उसने दासत्व स्वीकार किया। अपना शरीर बेचकर उसने इच्छा को स्वतंत्र रखना चाहा। परंतु स्वतंत्रता मिली कहाँ? कुल-नारी के लिए स्वतंत्रता कहाँ है?