“भ्रमरगीत के बहाने निर्गुणोपासना की धज्जियाँ उड़ाने में सूर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।” - इस कथन के संबंध में अपना मत प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1998, 55 Marks, )

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