‘चिन्तामणि’ के निम्नलिखित वाक्यों का भाव-विस्तारण कीजिए: (क) “श्रद्धा महत्त्व की आनन्दपूर्ण स्वीकृति के साथ-साथ पूज्य बुद्धि का संचार है।” (ख) “करुणा अपने बीज अपने आलम्बन या पात्र में नहीं फेंकती है।” (ग) “ईर्ष्या एक संकर भाव है जिसकी संप्राप्ति आलस्य, अभिमान और नैराश्य के योग से होती है।”
(UPSC 1984, 60 Marks, )
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‘चिन्तामणि’ के निम्नलिखित वाक्यों का भाव-विस्तारण कीजिए: (क) “श्रद्धा महत्त्व की आनन्दपूर्ण स्वीकृति के साथ-साथ पूज्य बुद्धि का संचार है।” (ख) “करुणा अपने बीज अपने आलम्बन या पात्र में नहीं फेंकती है।” (ग) “ईर्ष्या एक संकर भाव है जिसकी संप्राप्ति आलस्य, अभिमान और नैराश्य के योग से होती है।”
(UPSC 1984, 60 Marks, )