अंतरजामिहुतें बड़े बाहरजामि हैं राम, जे नाम लियेतें। धावत धेनु पेन्हाइ लवाइ ज्यों बालक-बोलनि कान कियेतें। आपनि बूझि कहै तुलसी कहिबे की न बावरि बात बियेतें। पैज परें प्रहलादहु को प्रगटे प्रभु पाहन तें, न हियेतें।। (UPSC 2012, 12 Marks, )

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