बोरति ग्यान बिराग करारे। बचन ससोक मिलत नद नारे।। सोच उसास समीर तंरगा। धीरज तट तरुबर कर भंगा।। बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।। केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।। बनचर कोल किरात बिचारे। थके बिलोकि पथिक हियँ हारे।। आश्रम उदधि मिली जब जाई। मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई।।
(UPSC 1979, 20 Marks, )
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बोरति ग्यान बिराग करारे। बचन ससोक मिलत नद नारे।। सोच उसास समीर तंरगा। धीरज तट तरुबर कर भंगा।। बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।। केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।। बनचर कोल किरात बिचारे। थके बिलोकि पथिक हियँ हारे।। आश्रम उदधि मिली जब जाई। मनहुँ उठेउ अंबुधि अकुलाई।।
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