दया, माया, ममता लो आज मधुरिमा लो, अगाध विश्वास; हमारा हृदय-रत्न-निधि स्वच्छ तुम्हारे लिए खुला है पास। बनो संसृति के मूल रहस्य, तुम्हीं से फैलेगी वह बेल; विश्व-भर सौरभ से भर जाय सुमन के खेलो सुंदर खेल। (UPSC 1998, 20 Marks, )

Enroll Now