हम डूबते हैं आप तो अध के अँधेरे कूप में— हैं किन्तु रखना चाहते उनको सती के रूप में। निज दक्षिणांग पुरीष से रखते सदा हम लिप्त हैं, वामांग में चंदन चढ़ाना चाहते, विक्षिप्त है। (UPSC 2008, 20 Marks, )

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