रास नाम बिनु गिरा न सोहा। देखु बिचारि त्यागि मद मोहा।। बसन हीन नहिं सोह सुरारी। सब भूषन भूषिक्र बर नारी।। राम बिमुख संपति प्रभुताई। जाइ रही पाई बिनु पार्ई।। सजल मूल जिन्ह सरितन्ह नाहीं। बरखि गएँ पुत्ति तबहिं सुखाहीं।। सुनु दसकंठ कहउँ पन रोपी। बिमुख राम त्राता नहिं कोपी।। संकर सहस बिष्नु अज लोही। सकहिं न राखि राम कर द्रोही।। (UPSC 2000, 20 Marks, )

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