परन्तु संसार—कठोर संसार ने सिखा दिया है कि तुम्हें परखना होगा। समझदारी आने पर यौवन चला जाता है—जब तक माला गूँथी जाती है, तब तक फूल कुम्हला जाते हैं। जिससे मिलने के सम्भार की इतनी धूमधाम, सजावट, बनावट होती है, उसके आने तक मनुष्य हृदय को सुन्दर और उपयुक्त नहीं बनाए रख सकता। मनुष्य की चञ्चल स्थिति तब तक उस श्यामल कोमल हृदय को मरुभूमि बना देती है। (UPSC 1991, 20 Marks, )

Enroll Now