जग जांचिए कोऊ न, जांचिए जो जिय जाँचिए जानकी- जानाहि रे। जेहि जाँचत जाचकता जरि जाइ जो जारति जोर जहानहि रे ॥ गति देखु बिचारि बिभीषन की, अर आनु हिए हनुमानहि रे। तुलसी भजु दारिद-दोष-दन्रानल, संकट-कोटि-कृपानहि रे॥ (UPSC 1988, 20 Marks, )

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