हिन्दी के स्वरूप-निर्धारण में भारतेन्दु युग का योगदान। (UPSC 2020, 10 Marks, )

Theme: भारतेन्दु युग: हिन्दी स्वरूप का विकास Where in Syllabus: (The subject of the above question is Hindi Literature.)
हिन्दी के स्वरूप-निर्धारण में भारतेन्दु युग का योगदान।

Introduction

भारतेन्दु युग हिन्दी साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण कालखंड है, जिसमें भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने भाषा के स्वरूप-निर्धारण में अहम भूमिका निभाई। इस युग में हिन्दी को सरल, सुबोध और जनमानस के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया। राजा शिवप्रसाद 'सितारे हिन्द' और बालकृष्ण भट्ट जैसे विचारकों ने भी भाषा के विकास में योगदान दिया। इस काल में हिन्दी गद्य और पद्य दोनों में नवाचार हुए, जिससे भाषा का आधुनिक स्वरूप उभर कर सामने आया।

भारतेन्दु युग: हिन्दी स्वरूप का विकास

 ● भारतेन्दु युग: हिन्दी साहित्य के आधुनिक काल के प्रथम चरण को 'भारतेन्दु युग' कहा जाता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र को इस युग का प्रतिनिधि माना जाता है।  
  ● प्रभावशाली व्यक्तित्व: भारतेन्दु का व्यक्तित्व प्रभावशाली था। वे सम्पादक, संगठनकर्ता, साहित्यकारों के नेता और समाज को दिशा देने वाले सुधारवादी विचारक थे।  
  ● देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना: इस युग की कविता में देशभक्ति की भावना प्रमुख थी। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश शासन के प्रति राज-भक्ति का स्वर भी सुनाई पड़ता है। उदाहरण: "केवल भारत के हित साधन में दीजे चित।" (प्रेमघन)  
  ● जनवादी विचारधारा: भारतेन्दु युग की कविता में जनवादी विचारधारा का समावेश था। यह समाज सुधार की भावना में समायी हुई थी। उदाहरण: "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।"  
  ● कथा साहित्य: भारतेन्दु काल में उपन्यास और कहानी का लेखन प्रारम्भ हुआ। पण्डित बालकृष्ण भट्ट का 'सौ अजान एक सुजान' और भारतेन्दु की 'अद्भुत अपूर्व स्वप्न' इस युग की प्रमुख रचनाएँ हैं।  
  ● निबन्ध और आलोचना: भारतेन्दु युग में निबन्ध साहित्य का प्रारम्भ हुआ। भारतेन्दु ने 'कविवचन सुधा' और 'हरिश्चन्द्र मैगजीन' में साहित्यिक ढंग से निबन्ध लिखे। आलोचना विधा में भी नए तत्वों का समावेश हुआ।  
  ● भाषा और छंद: इस युग की कविता में छंद, भाषा और अभिव्यंजना पद्धति में प्राचीनता अधिक थी। खड़ी बोली का आन्दोलन प्रारम्भ हो चुका था, किन्तु कविता के क्षेत्र में ब्रज भाषा ही सर्वमान्य रही।  
  ● सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना: भारतेन्दु युग में हिन्दी प्रदेश और देश में आधुनिक जीवन चेतना का उद्घोष हुआ। साहित्य रचना में मध्यमवर्गीय सामाजिक चेतना का प्रभाव देखा गया।  

Conclusion

भारतेन्दु युग ने हिन्दी के स्वरूप-निर्धारण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस युग में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने भाषा को सरल और जनसाधारण के लिए सुलभ बनाया। उन्होंने साहित्य में सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का संचार किया। राजा शिवप्रसाद 'सितारे हिन्द' और बालकृष्ण भट्ट जैसे लेखकों ने भी भाषा के विकास में योगदान दिया। भारतेन्दु युग ने हिन्दी को एक सशक्त और समृद्ध भाषा के रूप में स्थापित किया, जो आगे चलकर आधुनिक हिन्दी साहित्य की नींव बनी।