पीछे लागा जाइ था, लोक वेद के साथ। आगै थैं सतगुर मिल्या, दीपक दीया हाथ।। समंदर लागी आगि, नदियाँ जलि कोइला भई। देखि कबीरा जागि, मंछी रूषाँ चढ़ि गई।। अंबर कुँजां कुरलियाँ गरजि भरे सब तल। जिनि पैं गोविद बीछुटे, तिनके कौण हवाल।। (UPSC 1992, 20 Marks, )

Enroll Now