"दो विश्व युद्धों के बीच लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई"
(UPSC 2021,15 Marks,250 Words)
“There arose a serious challenge to the Democratic State System between the two World Wars.” Evaluate the statement.
"दो विश्व युद्धों के बीच लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई"
(UPSC 2021,15 Marks,250 Words)
प्रस्तावना
दो विश्व युद्धों के बीच की अवधि लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली (Democratic State System) के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियों से चिह्नित थी
Explanation
Challenges to the Democratic State System between the two World Wars
1. अधिनायकवादी (Authoritarian) शासन का उदय:
- इटली में बेनिटो मुसोलिनी और जर्मनी में एडोल्फ हिटलर के नेतृत्व में फासीवादी (Fascist) शासन का उदय लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया।
- इन शासनों ने लोकतांत्रिक सिद्धांतों को अधिनायकवादी शासन से बदलने की कोशिश की, राजनीतिक विरोध को दबाया और नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित किया।
- इन शासनों के उदय ने मजबूत नेतृत्व की अपील और लोकतांत्रिक मानदंडों के क्षरण को प्रदर्शित किया।
2. आर्थिक संकट:
- 1929 में शुरू हुई महामंदी (Great Depression) का लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ा।
- आर्थिक अस्थिरता और व्यापक बेरोजगारी ने संकट का प्रभावी ढंग से समाधान करने में लोकतांत्रिक सरकारों की क्षमता पर विश्वास खो दिया।
- इसने चरमपंथी विचारधाराओं के उदय और लोकतांत्रिक संस्थानों के क्षरण के लिए उपजाऊ जमीन तैयार की।
3. लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण:
- अंतरयुद्ध काल में लोकतांत्रिक मूल्यों में गिरावट देखी गई, जैसा कि नागरिक स्वतंत्रताओं के क्षरण और सेंसरशिप (Censorship) और प्रचार (Propaganda) के उदय से स्पष्ट है।
- लोकतांत्रिक सरकारें सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही थीं और समय की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करने में विफल रहीं।
- लोकतांत्रिक मूल्यों का क्षरण लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली को और कमजोर कर गया।
निष्कर्ष
यह कथन कि दो विश्व युद्धों के बीच लोकतांत्रिक राज्य प्रणाली (Democratic State System) को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा, सही है। अधिनायकवादी शासन (authoritarian regimes) के उदय, आर्थिक संकटों (economic crises), और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण ने इस अवधि के दौरान लोकतांत्रिक प्रणालियों को कमजोर करने में योगदान दिया। इन चुनौतियों के दूरगामी परिणाम हुए और इसके बाद के वैश्विक संघर्षों के लिए मंच तैयार किया।