भारत के लाखों शहरों में भारी बाढ़ का कारण बताएं, जिनमें हैदराबाद और पुणे जैसे स्मार्ट शहर शामिल हैं। स्थायी सुधारात्मक उपाय सुझाएं।
(UPSC 2020,15 Marks,)
Account for the huge flooding of million cities in India including the smart ones like Hyderabad and Pune. Suggest lasting remedial measures.
प्रस्तावना
शहरी बाढ़ (Urban floods) शहरों और उनके निवासियों के लिए महत्वपूर्ण जोखिम उत्पन्न करती है, जिससे बुनियादी ढांचे को नुकसान होता है, दैनिक जीवन में बाधा आती है, और जीवन को खतरा होता है। शहरी बाढ़ के पीछे के कारणों को समझना और तैयारी के लिए तंत्र लागू करना ऐसे घटनाओं से जुड़े प्रभाव और जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण है।
Explanation
Causes of Huge Flooding in Million Cities in India
1. शहरीकरण और बुनियादी ढांचा विकास:
- तेजी से शहरीकरण के कारण कंक्रीट सतहों में वृद्धि होती है, जिससे प्राकृतिक जल निकासी कम हो जाती है।
- खराब योजना वाला बुनियादी ढांचा, अपर्याप्त तूफानी जल निकासी प्रणाली।
2. वनों की कटाई और भूमि उपयोग परिवर्तन:
- वनस्पति की हटाने से मिट्टी की पारगम्यता (permeability) कम हो जाती है, जिससे सतही बहाव में वृद्धि होती है।
- प्राकृतिक जल-अवशोषित क्षेत्रों का शहरी विकास में परिवर्तन बाढ़ को बढ़ाता है।
3. जलवायु परिवर्तन:
- वर्षा पैटर्न में परिवर्तन, तीव्र वर्षा की घटनाएं फ्लैश बाढ़ में योगदान करती हैं।
- समुद्र स्तर में वृद्धि से तटीय शहरों में जलमग्नता हो सकती है।
4. खराब कचरा प्रबंधन:
- ठोस कचरे और प्लास्टिक के अनुचित निपटान के कारण नालियां जाम हो जाती हैं।
- अप्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली जल निकासी में भीड़भाड़ में योगदान करती है।
5. जल निकायों का अतिक्रमण:
- नदियों और जल निकायों के पास अनियोजित निर्माण से प्राकृतिक जल निकासी कम हो जाती है।
- आर्द्रभूमि और झीलों को भरने से प्राकृतिक बाढ़ बफर समाप्त हो जाते हैं।
6. सतत शहरी योजना की कमी:
- शहरी विकास योजनाओं में बाढ़-प्रवण क्षेत्रों पर अपर्याप्त विचार।
- सतत भूमि-उपयोग योजना की अनुपस्थिति से संवेदनशीलता बढ़ती है।
Case Studies of Huge Flooding in Smart Cities
A. हैदराबाद:
- शहरी विकास अवसंरचना (Infrastructure) से आगे:
o जल निकासी प्रणालियों में सुधार के बिना तेजी से विस्तार।
o जल निकासी के लिए मौजूदा जल निकायों पर अत्यधिक निर्भरता, जिससे ओवरलोड हो रहा है।
- तीव्र वर्षा घटनाएँ:
o 2020 में अभूतपूर्व वर्षा के कारण कई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई।
o अत्यधिक मौसम की घटनाओं के लिए अपर्याप्त तैयारी ने प्रभाव को बढ़ा दिया।
- जल निकायों का अतिक्रमण: शहरी जल निकासी क्षमता ने बाढ़ के जोखिम को बढ़ा दिया।
B. पुणे:
- भू-आकृति और भूमि उपयोग:
o पुणे के कुछ हिस्सों में पहाड़ी भूभाग इसे अचानक बाढ़ के प्रति संवेदनशील बनाता है।
o संवेदनशील क्षेत्रों में अनियमित निर्माण जोखिम को बढ़ाता है।
- बाढ़ की तैयारी की कमी:
o अपर्याप्त प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और आपातकालीन प्रतिक्रिया योजनाएँ।
o अचानक और तीव्र वर्षा को संभालने की सीमित क्षमता।
- शहरीकरण और नदी का संकुचन:
o बिना उचित योजना के नदी किनारों के साथ शहरी विस्तार।
o विकास के कारण नदियों का संकुचन उनकी वहन क्षमता को कम करता है।
Remedial measures for urban floods
- जल निकासी बुनियादी ढांचे में सुधार करें:
o अत्यधिक वर्षा को कुशलतापूर्वक संभालने के लिए तूफानी जल निकासी (stormwater drains) की क्षमता और रखरखाव को बढ़ाएं।
o उदाहरण: भारी बारिश के दौरान बाढ़ को रोकने के लिए शहरी क्षेत्रों में मौजूदा जल निकासी प्रणालियों (drainage systems) को उन्नत करें।
- जल निकायों का संरक्षण और पुनर्स्थापन करें:
o झीलों, नदियों और आर्द्रभूमियों (wetlands) को अतिक्रमण और प्रदूषण से बचाएं ताकि उनकी प्राकृतिक जल धारण क्षमता बनी रहे।
o उदाहरण: स्थानीय आर्द्रभूमियों को साफ और पुनर्स्थापित करने के लिए संरक्षण परियोजनाएं लागू करें, यह सुनिश्चित करते हुए कि वे बाढ़ के पानी को अवशोषित कर सकें।
- बाढ़ क्षेत्रीय नियमन (flood zoning regulations) लागू करें:
o बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में निर्माण को प्रतिबंधित करें और बाढ़ जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भवन कोड (building codes) का पालन सुनिश्चित करें।
o उदाहरण: उच्च बाढ़ जोखिम वाले क्षेत्रों में नए विकास को रोकने के लिए कुछ क्षेत्रों को नो-बिल्ड जोन (no-build zones) के रूप में नामित करें।
- शहरी योजना को बढ़ावा दें:
o बाढ़-प्रवण क्षेत्रों पर विचार करने और स्थायी जल निकासी प्रणालियों (sustainable drainage systems) को शामिल करने वाली व्यापक भूमि-उपयोग योजनाएं विकसित करें।
o उदाहरण: भविष्य के विकास और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मार्गदर्शन करने के लिए शहर की योजना में बाढ़ जोखिम आकलन (flood risk assessments) को एकीकृत करें।
- हरी बुनियादी ढांचे (green infrastructure) को बढ़ावा दें:
o जल को अवशोषित करने और सतही बहाव (surface runoff) को कम करने के लिए पारगम्य सतहों (permeable surfaces), वर्षा उद्यान (rain gardens), और हरे छतों (green roofs) का उपयोग बढ़ाएं।
o उदाहरण: वाणिज्यिक भवनों पर हरे छतों की स्थापना को प्रोत्साहित करें ताकि प्राकृतिक रूप से तूफानी जल का प्रबंधन किया जा सके।
- उन्नत प्रौद्योगिकियों (advanced technologies) को अपनाएं:
o बाढ़ की स्थितियों की प्रभावी ढंग से भविष्यवाणी और प्रतिक्रिया करने के लिए रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम (real-time monitoring systems), प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (early warning systems), और डेटा एनालिटिक्स (data analytics) का उपयोग करें।
o उदाहरण: निवासियों को रीयल-टाइम अपडेट प्रदान करने के लिए शहर-व्यापी बाढ़ चेतावनी प्रणाली (flood alert system) लागू करें।
- कचरा प्रबंधन को मजबूत करें:
o जल निकासी प्रणालियों को अवरुद्ध करने और बाढ़ के जोखिम को कम करने के लिए उचित कचरा निपटान और रीसाइक्लिंग सिस्टम (recycling systems) लागू करें।
o उदाहरण: जल निकासी प्रणालियों को अवरुद्ध कर सकने वाले कचरे को कम करने के लिए सामुदायिक रीसाइक्लिंग कार्यक्रम (community recycling programs) शुरू करें।
- सार्वजनिक जागरूकता और भागीदारी को बढ़ावा दें:
o नागरिकों को जिम्मेदार कचरा निपटान, बाढ़ की तैयारी, और जल निकासी प्रणालियों के रखरखाव के महत्व के बारे में शिक्षित करें। बाढ़ प्रबंधन पहलों में सामुदायिक भागीदारी को प्रोत्साहित करें।
o उदाहरण: निवासियों को बाढ़ के लिए तैयार होने के तरीके सिखाने के लिए कार्यशालाओं और अभियानों का आयोजन करें।
निष्कर्ष
शहरी बाढ़ (urban flooding) के कारणों को संबोधित करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, जिसमें उन्नत बुनियादी ढांचा (improved infrastructure), सतत शहरी योजना (sustainable urban planning), उन्नत प्रौद्योगिकियाँ (advanced technologies), और सामुदायिक भागीदारी (community participation) शामिल हैं। सुधारात्मक उपायों को लागू करके और सफल केस स्टडीज (case studies) से सीखकर, भारत के शहर शहरी बाढ़ के प्रभाव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित और कम कर सकते हैं, जिससे उनके निवासियों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित हो सके।