स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रयुक्त होने वाली हिन्दी अपनी किन विशेषताओं के साथ राष्ट्रभाषा बनी? स्पष्ट कीजिए। (UPSC 2019, 15 Marks, )

Theme: स्वतंत्रता संग्राम की हिन्दी: राष्ट्रभाषा की विशेषताएँ Where in Syllabus: (Modern Indian History)
स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रयुक्त होने वाली हिन्दी अपनी किन विशेषताओं के साथ राष्ट्रभाषा बनी? स्पष्ट कीजिए।

Introduction

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान हिन्दी ने अपनी सरलता, व्यापकता और जनसाधारण की भाषा होने के कारण राष्ट्रभाषा का दर्जा पाया। महात्मा गांधी ने इसे जन-जन की भाषा कहा, जबकि राजेन्द्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय एकता का माध्यम माना। हिन्दी की लचीलापन और विभिन्न बोलियों को समाहित करने की क्षमता ने इसे स्वतंत्रता संग्राम में एक सशक्त माध्यम बनाया। हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता ने भी जनजागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वतंत्रता संग्राम की हिन्दी: राष्ट्रभाषा की विशेषताएँ

 ● राष्ट्रीय अस्मिता और राष्ट्रभाषा: स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय अस्मिता की भावना ने लोगों को एकजुट किया। इस प्रक्रिया में राष्ट्रभाषा का महत्व बढ़ा क्योंकि यह राष्ट्रीय अस्मिता का एक अनिवार्य अंग है। हिंदी को इस भूमिका में चुना गया क्योंकि यह राष्ट्रीय एकता और अन्तप्रांतीय संवाद के लिए उपयुक्त थी।  
  ● जनता और सरकार के बीच संवाद: हिंदी ने जनता से जनता और जनता से सरकार के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब फारसी और अंग्रेजी के माध्यम से संवाद में कठिनाई हुई, तो फोर्ट विलियम कॉलेज में हिंदी सिखाने की व्यवस्था की गई। इससे हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता और देशव्यापी प्रसार को बल मिला।  
  ● व्यावहारिक उपयोगिता और लचीलापन: विद्वानों जैसे विलियम केरी और एच.टी. कोलब्रुक ने हिंदी की व्यावहारिक उपयोगिता और लचीलेपन की सराहना की। हिंदी को ग्रेट लिंगुआ फ्रैंका के रूप में देखा गया, जो पढ़े-लिखे और अनपढ़ दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी थी।  
  ● राष्ट्रीय पुनर्जागरण की भाषा: हिंदी ने राष्ट्रीय पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजा राममोहन राय जैसे समाज सुधारकों ने हिंदी के महत्व को समझा और इसे राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक माना। उन्होंने वेदांत सूत्र का हिंदी में अनुवाद किया, जिससे हिंदी की आवश्यकता को बल मिला।  
  ● गांधीजी और स्वदेशी आंदोलन: महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया को तेज किया। अंग्रेजी के विकल्प के रूप में हिंदी को प्रस्तुत किया गया। गांधीजी ने राष्ट्रभाषा प्रचार सभाएं स्थापित कीं ताकि हिंदी को सुदृढ़ किया जा सके और अंग्रेजी के प्रभाव को कम किया जा सके।  

Conclusion

स्वतंत्रता आन्दोलन के दौरान प्रयुक्त हिन्दी ने अपनी सरलता, व्यापकता और जनसाधारण की भाषा होने के कारण राष्ट्रभाषा का दर्जा पाया। महात्मा गांधी ने इसे जन-जन की भाषा कहा। हिन्दी ने विभिन्न प्रांतों के लोगों को एकजुट किया और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुभाष चंद्र बोस ने इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना। आगे बढ़ते हुए, हिन्दी को तकनीकी और वैश्विक संदर्भों में समृद्ध करना आवश्यक है ताकि यह आधुनिक युग की चुनौतियों का सामना कर सके।