स्वाधीनता आंदोलन की संघर्ष भाषा के रूप में हिंदी की प्रतिष्ठा पर विचार कीजिए।
(UPSC 2023, 15 Marks, )
Theme:
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका
Where in Syllabus:
(Modern History)
स्वाधीनता आंदोलन की संघर्ष भाषा के रूप में हिंदी की प्रतिष्ठा पर विचार कीजिए।
स्वाधीनता आंदोलन की संघर्ष भाषा के रूप में हिंदी की प्रतिष्ठा पर विचार कीजिए।
(UPSC 2023, 15 Marks, )
Theme:
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका
Where in Syllabus:
(Modern History)
स्वाधीनता आंदोलन की संघर्ष भाषा के रूप में हिंदी की प्रतिष्ठा पर विचार कीजिए।
Introduction
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी ने संघर्ष की भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी ने हिंदी को जनमानस की भाषा मानते हुए इसे राष्ट्रीय एकता का माध्यम बताया। बाल गंगाधर तिलक और जवाहरलाल नेहरू ने भी हिंदी के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। 1925 में हिंदी साहित्य सम्मेलन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रस्ताव पारित किया, जिससे हिंदी की प्रतिष्ठा और बढ़ी। हिंदी ने स्वतंत्रता संग्राम में जनजागरण का कार्य किया।
स्वाधीनता आंदोलन में हिंदी की भूमिका
● राष्ट्रीय आंदोलन और हिंदी की भूमिका:
○ 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद, जैसे-जैसे राष्ट्रीय आंदोलन ने जोर पकड़ा, वैसे-वैसे राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय झंडा, और राष्ट्रभाषा की संकल्पना भारतीयों के मन में बलवती होती गई।
● लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में समर्थन दिया।
● गांधी जी और हिंदी:
○ गांधी जी ने हिंदी के प्रश्न को स्वराज्य का प्रश्न माना।
○ 1917 में भड़ौच में आयोजित गुजरात शिक्षा परिषद के अधिवेशन में गांधी जी ने हिंदी के लिए पांच लक्षण या शर्तें बताईं, जैसे कि भाषा का सरल होना, व्यापक रूप से बोली जाने वाली, और धार्मिक, आर्थिक, और राजनीतिक व्यवहार में सक्षम होना।
○ गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार्यता दिलाई।
● कांग्रेस और हिंदी:
○ 1925 में कानपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया कि अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस की कार्यवाही हिंदी में चलाई जाए।
○ 1937 में कुछ राज्यों में कांग्रेस के मंत्रिमंडल ने हिंदी के अध्ययन को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया।
● अन्य नेताओं का योगदान:
● सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1940 में कराची कांग्रेस अधिवेशन में अपना भाषण पहले हिंदी में पढ़ा।
● सुभाष चंद्र बोस ने 1918 और 1929 में हिंदी में भाषण देकर हिंदी को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने की बात की।
● सी. राजगोपालाचारी ने दक्षिण भारतीयों को हिंदी सीखने की सलाह दी।
● हिंदी का सांस्कृतिक प्रभाव:
○ हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में सुदृढ़ करने के लिए गांधी जी ने वर्धा और मद्रास में राष्ट्रभाषा प्रचार सभाएं स्थापित कीं।
● विद्यापीठों और हिंदी साहित्य सम्मेलनों की ओर से हिंदी में परीक्षाएं आयोजित की गईं।
● समाज सुधारकों और पत्रकारों का योगदान:
○ समाज सुधारकों और पत्रकारों ने राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए माध्यम के रूप में हिंदी को अपनाया और उसे आगे बढ़ाया।
○ कांग्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान जनता से संवाद स्थापित करने के लिए हिंदी को चुना और उसे राष्ट्रभाषा की गरिमा दी।
○ 1885 में कांग्रेस की स्थापना के बाद, जैसे-जैसे राष्ट्रीय आंदोलन ने जोर पकड़ा, वैसे-वैसे राष्ट्रीयता, राष्ट्रीय झंडा, और राष्ट्रभाषा की संकल्पना भारतीयों के मन में बलवती होती गई।
● लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के रूप में समर्थन दिया।
● गांधी जी और हिंदी:
○ गांधी जी ने हिंदी के प्रश्न को स्वराज्य का प्रश्न माना।
○ 1917 में भड़ौच में आयोजित गुजरात शिक्षा परिषद के अधिवेशन में गांधी जी ने हिंदी के लिए पांच लक्षण या शर्तें बताईं, जैसे कि भाषा का सरल होना, व्यापक रूप से बोली जाने वाली, और धार्मिक, आर्थिक, और राजनीतिक व्यवहार में सक्षम होना।
○ गांधी जी के स्वदेशी आंदोलन ने हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार्यता दिलाई।
● कांग्रेस और हिंदी:
○ 1925 में कानपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया कि अखिल भारतीय स्तर पर कांग्रेस की कार्यवाही हिंदी में चलाई जाए।
○ 1937 में कुछ राज्यों में कांग्रेस के मंत्रिमंडल ने हिंदी के अध्ययन को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया।
● अन्य नेताओं का योगदान:
● सरदार वल्लभभाई पटेल ने 1940 में कराची कांग्रेस अधिवेशन में अपना भाषण पहले हिंदी में पढ़ा।
● सुभाष चंद्र बोस ने 1918 और 1929 में हिंदी में भाषण देकर हिंदी को राष्ट्रभाषा का गौरव दिलाने की बात की।
● सी. राजगोपालाचारी ने दक्षिण भारतीयों को हिंदी सीखने की सलाह दी।
● हिंदी का सांस्कृतिक प्रभाव:
○ हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में सुदृढ़ करने के लिए गांधी जी ने वर्धा और मद्रास में राष्ट्रभाषा प्रचार सभाएं स्थापित कीं।
● विद्यापीठों और हिंदी साहित्य सम्मेलनों की ओर से हिंदी में परीक्षाएं आयोजित की गईं।
● समाज सुधारकों और पत्रकारों का योगदान:
○ समाज सुधारकों और पत्रकारों ने राष्ट्रीय पुनर्जागरण के लिए माध्यम के रूप में हिंदी को अपनाया और उसे आगे बढ़ाया।
○ कांग्रेस ने राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान जनता से संवाद स्थापित करने के लिए हिंदी को चुना और उसे राष्ट्रभाषा की गरिमा दी।
Conclusion
स्वाधीनता आंदोलन के दौरान हिंदी ने संघर्ष की भाषा के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी ने इसे जनमानस की भाषा कहा, जिससे यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बनी। हिंदी ने विभिन्न प्रांतों के लोगों को एकजुट किया और स्वतंत्रता संग्राम को गति दी। आज भी हिंदी को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा और प्रशासन में इसके व्यापक उपयोग की आवश्यकता है। रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था, "भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति का वाहक है।"