संत साहित्य में अवधी का योगदान।
(UPSC 2018, 10 Marks, )
Theme:
संत साहित्य में अवधी का महत्वपूर्ण योगदान
Where in Syllabus:
(Medieval Indian Literature and Language Studies.)
संत साहित्य में अवधी का योगदान।
संत साहित्य में अवधी का योगदान।
(UPSC 2018, 10 Marks, )
Theme:
संत साहित्य में अवधी का महत्वपूर्ण योगदान
Where in Syllabus:
(Medieval Indian Literature and Language Studies.)
संत साहित्य में अवधी का योगदान।
Introduction
अवधी भाषा का संत साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान है। कबीर, तुलसीदास, और मलूकदास जैसे संत कवियों ने अवधी में रचनाएँ कीं, जो भक्ति और सामाजिक सुधार के संदेश देती हैं। रामचरितमानस जैसी रचनाएँ अवधी में लिखी गईं, जो जनमानस में गहराई से समाई हैं। अवधी की सरलता और भावप्रवणता ने इसे संत साहित्य में एक विशेष स्थान दिलाया, जिससे यह भाषा भक्ति आंदोलन का एक सशक्त माध्यम बनी।
संत साहित्य में अवधी का महत्वपूर्ण योगदान
● अवधी का साहित्यिक महत्व: मध्ययुग में ब्रजभाषा के बाद अवधी का स्थान महत्वपूर्ण है। जागनिक के 'अल्हाखंड' में अवधी के प्रयोग मिलते हैं, हालांकि यह बाद के प्रक्षेप हैं।
● संत साहित्य में अवधी का योगदान:
● मलूकदास, धरनीदास, जगजीवन, दूलन आदि संतों की भाषा में अवधी का पुट है, जिसे 'सधुक्कड़ी' कहा गया है।
● गौतम बुद्ध और श्रावस्ती के वैभवकाल से लेकर बारहवीं सदी में गोविन्दचन्द्र गहड़वार और दामोदर पंडित के समय तक अवधी अथवा प्राचीन कोसली की भूमिका रही थी।
● अवध का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व:
○ मध्यकालीन इतिहास में अवध प्रमुख राजनीतिक केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। यहां के मुसलमानों और हिन्दुओं में पारस्परिक सौहार्द और सामंजस्य अधिक रहा।
○ इस क्षेत्र में सूफी काव्य के विकसित होने का अनुकूल अवसर उपलब्ध हुआ।
● रामभक्ति और अवधी:
● रामभक्त कवियों का अवधी के साहित्यिक विकास में प्रमुख हाथ था।
● राम की जन्मभूमि की भाषा अवधी थी, जो रामभक्त कवियों के लिए पवित्र आकर्षण की वस्तु थी।
● अवधी के दो रूप:
● ठेठ अवधी: ग्रामीण अवधी को काव्यभाषा बनाने वाले प्रेमाख्यानकों की रचना करने वाले सूफी कवि हैं।
● परिमार्जित अवधी: अवधी को परिनिष्ठित काव्यभाषा के रूप में विकसित करने वाले महाकवि तुलसी हैं।
● प्रमुख रचनाएं और कवि:
● लोरिक या चंदायन की काव्यभाषा अवधी है।
● जायसी का 'पदमावत्' महाकाव्य अवधी भाषा में निबद्ध है, जो अवधी की अद्भुत काव्य क्षमता को उजागर करता है।
● कुतुबन की मृगावती का उल्लेख किया जाता है, जो काफी लोकप्रिय काव्य था।
● तुलसीदास का योगदान:
○ तुलसी ने अवधी को ठेठ रूप से ऊपर उठाकर साहित्यिक भाषा का संस्कार दिया।
○ उन्होंने विनय पत्रिका, गीतावली, दोहावली आदि रचनाओं को ब्रजभाषा में निबद्ध किया।
● संत साहित्य में अवधी का योगदान:
● मलूकदास, धरनीदास, जगजीवन, दूलन आदि संतों की भाषा में अवधी का पुट है, जिसे 'सधुक्कड़ी' कहा गया है।
● गौतम बुद्ध और श्रावस्ती के वैभवकाल से लेकर बारहवीं सदी में गोविन्दचन्द्र गहड़वार और दामोदर पंडित के समय तक अवधी अथवा प्राचीन कोसली की भूमिका रही थी।
● अवध का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व:
○ मध्यकालीन इतिहास में अवध प्रमुख राजनीतिक केन्द्र के रूप में प्रतिष्ठित हुआ। यहां के मुसलमानों और हिन्दुओं में पारस्परिक सौहार्द और सामंजस्य अधिक रहा।
○ इस क्षेत्र में सूफी काव्य के विकसित होने का अनुकूल अवसर उपलब्ध हुआ।
● रामभक्ति और अवधी:
● रामभक्त कवियों का अवधी के साहित्यिक विकास में प्रमुख हाथ था।
● राम की जन्मभूमि की भाषा अवधी थी, जो रामभक्त कवियों के लिए पवित्र आकर्षण की वस्तु थी।
● अवधी के दो रूप:
● ठेठ अवधी: ग्रामीण अवधी को काव्यभाषा बनाने वाले प्रेमाख्यानकों की रचना करने वाले सूफी कवि हैं।
● परिमार्जित अवधी: अवधी को परिनिष्ठित काव्यभाषा के रूप में विकसित करने वाले महाकवि तुलसी हैं।
● प्रमुख रचनाएं और कवि:
● लोरिक या चंदायन की काव्यभाषा अवधी है।
● जायसी का 'पदमावत्' महाकाव्य अवधी भाषा में निबद्ध है, जो अवधी की अद्भुत काव्य क्षमता को उजागर करता है।
● कुतुबन की मृगावती का उल्लेख किया जाता है, जो काफी लोकप्रिय काव्य था।
● तुलसीदास का योगदान:
○ तुलसी ने अवधी को ठेठ रूप से ऊपर उठाकर साहित्यिक भाषा का संस्कार दिया।
○ उन्होंने विनय पत्रिका, गीतावली, दोहावली आदि रचनाओं को ब्रजभाषा में निबद्ध किया।
Conclusion
संत साहित्य में अवधी का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। कबीर, तुलसीदास, और रैदास जैसे संतों ने अवधी में रचनाएँ कीं, जो समाज में सुधार और आध्यात्मिक जागरूकता लाने में सहायक रहीं। तुलसीदास की रामचरितमानस अवधी में लिखी गई, जो आज भी जनमानस में लोकप्रिय है। कबीर के दोहे समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हैं। आगे बढ़ते हुए, अवधी साहित्य को डिजिटल माध्यमों से व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सकता है।