हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में नागरी प्रचारिणी सभा, काशी और दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, चेन्नई (मद्रास) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (UPSC 2018, 15 Marks, )
हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में नागरी प्रचारिणी सभा, काशी और दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, चेन्नई (मद्रास) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।View Answer
Introduction
नागरी प्रचारिणी सभा, काशी और दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा, चेन्नई ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1893 में स्थापित नागरी प्रचारिणी सभा ने हिन्दी साहित्य और भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान दिया। वहीं, 1918 में महात्मा गांधी के प्रेरणा से स्थापित दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा ने दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रचार में अहम भूमिका निभाई। इन संस्थाओं ने हिन्दी को राष्ट्रीय एकता का माध्यम बनाने में सहयोग किया।
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Introduction
हिन्दी के प्रचार-प्रसार में दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा और हिन्दी साहित्य सम्मेलन का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। 1918 में महात्मा गांधी के प्रयासों से स्थापित दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा ने दक्षिण भारत में हिन्दी के प्रसार को बढ़ावा दिया। वहीं, 1910 में स्थापित हिन्दी साहित्य सम्मेलन ने हिन्दी साहित्य के विकास और मानकीकरण में अहम भूमिका निभाई। इन संस्थाओं ने हिन्दी को राष्ट्रीय एकता की भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
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Introduction
राष्ट्रभाषा हिन्दी के आन्दोलन में महाराष्ट्र और पंजाब का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महाराष्ट्र में बाल गंगाधर तिलक ने हिन्दी को राष्ट्रीय एकता का माध्यम माना, जबकि पंजाब में लाला लाजपत राय ने हिन्दी को भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताया। इन प्रान्तों के विचारकों ने हिन्दी को सम्पर्क भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए जोर दिया, जिससे हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता प्राप्त करने में सहायता मिली।
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राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी के प्रचार प्रसार और प्रतिष्ठा के प्रति स्वतन्त्रता आन्दोलन के मध्य, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों के योगदान पर विचार कीजिए। (UPSC 1984, 60 Marks, )
राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी के प्रचार प्रसार और प्रतिष्ठा के प्रति स्वतन्त्रता आन्दोलन के मध्य, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों के योगदान पर विचार कीजिए।Enroll Now
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स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिन्दी के प्रचार-प्रसार में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी ने हिन्दी को जन-जन की भाषा बनाने पर जोर दिया। 'हिन्दुस्तान', 'अभ्युदय', 'प्रताप' जैसे पत्रों ने हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में योगदान दिया। इन माध्यमों ने हिन्दी को राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे स्वतंत्रता संग्राम को बल मिला।
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