Q 5(a). 1857 के पश्चात् और स्वतंत्रता से पहले के किसान आंदोलनों को संक्षिप्त में समझाइये ।
(UPSC 2025,10 Marks,150 Words)
सिलेबस में कहां
:
(आधुनिक इतिहास (Modern History))
Explain briefly the role of Peasant Movements after 1857 and before independence.
प्रस्तावना
1857 के बाद और स्वतंत्रता से पहले, किसान आंदोलनों ने भारत में औपनिवेशिक शोषण और सामंती उत्पीड़न को चुनौती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन आंदोलनों, जैसे कि नील विद्रोह (1859-60) और बारडोली सत्याग्रह (1928), को उच्च करों, अनुचित भूमि प्रथाओं और दमनकारी जमींदारों के खिलाफ शिकायतों द्वारा प्रेरित किया गया था। महात्मा गांधी और स्वामी सहजानंद सरस्वती जैसे विचारकों ने इन आंदोलनों का समर्थन किया, कृषि सुधार और सामाजिक न्याय की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसने अंततः भारतीय स्वतंत्रता के व्यापक संघर्ष में योगदान दिया। (English Meaning)
Explanation
Role of Peasant Movements after 1857
Role of Peasant Movements before independence
निष्कर्ष
1857 के बाद, किसान आंदोलनों ने भारत में औपनिवेशिक शोषण और सामंती उत्पीड़न को चुनौती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ये आंदोलन, जैसे कि नील विद्रोह (1859-60), दक्कन दंगे (1875), और बारडोली सत्याग्रह (1928), उच्च करों, दमनकारी जमींदारों, और शोषणकारी प्रथाओं के खिलाफ शिकायतों से प्रेरित थे। उन्होंने ग्रामीण जनता को जागरूक और संगठित करके व्यापक राष्ट्रवादी आंदोलनों की नींव रखी। महात्मा गांधी और अन्य नेताओं ने अक्सर इन विद्रोहों से प्रेरणा ली, और किसान मुद्दों को स्वतंत्रता के लिए बड़े संघर्ष में शामिल किया। जैसा कि डी. डी. कोसंबी ने कहा, ये आंदोलन ग्रामीण जनता के बीच "एक नई चेतना की पहली हलचल" थे, जो कृषि सुधार और सामाजिक न्याय की आवश्यकता को उजागर करते हैं। (English Meaning)